Chaitra Navratri

Chaitra Navratri: जानें नवरात्रि के दौरान क्यों जरुरी है कन्या और शक्तिपीठ पूजन

कन्या और शक्तिपीठ पूजन

जैसे के आप सभी जानते हैं की नवरात्रि का पावन पर्व चल रहा है। नवरात्रि में माता दुर्गा के 9 रूपों की पूजा की जाती है। बता दें की नवरात्रि में दुर्गा पूजा का विशेष स्थान है। इसी के दौरान कलश स्थापना, मां दुर्गा की स्तुति, मधुर घंटियों की आवाज, धूप-बत्ती की सुगन्ध एवं सात्विक भोजन या व्रत के नौ दिनों तक चलती है। नवरात्रि के दौरान कन्या पूजन का भी बहुत महत्व माना गया है, जिसके बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं। 

कन्याओं का पूजन: इस पूजन में अष्टमी या नवमी को 9 कुमारी कन्याओं का पूजन किया जाता है। इसमें 2 से 10 वर्ष की कन्या का पूजन किया जाता है जिसमें 2 वर्ष की कन्या को कुमारी, 3 वर्ष की कन्या को त्रिमूर्ति, 4 वर्ष की कन्या को कल्याणी, इसी तरह 5 वर्ष की कन्या को रोहिणी, 6 वर्ष की कन्या को कालिका, 7 वर्ष की कन्या को शाम्भवी, 8 वर्ष की कन्या को दुर्गा, 9 वर्ष की कन्या को चण्डिका तथा 10 वर्ष की कन्या को सुभद्रा माना जाता है।

शक्तिपीठ का पूजन: जिन स्थानों पर माता सती के अंग गिरे थे, उन स्थानों पर एक-एक शक्ति तथा एक-एक भैरव की स्थापना हुई। इन्हीं स्थानों को शक्तिपीठ के रूप में जाना जाता है। कहा जाता है कि इन स्थानों पर मां का वास है तथा यहां पूजाअर्चना करने से त्वरित फल प्राप्त होता है। यही कारण है कि नवरात्रों में लोग बड़ी संख्या में इन धामों की यात्रा करना अपना सौभाग्य समझते हैं। जालंधर के श्री देवी तालाब मन्दिर में स्थित त्रिपुरमालिनी धाम पर भी आजकल श्रद्धालुओं का मेला लगा रहता है।



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