In the Kashi Vishwanath temple offerings

काशी विश्वनाथ मंदिर में आरती के बाद भक्तों को प्रसाद ग्रहण कराया जाता है

वाराणसी (उत्तर प्रदेश) : वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर में आरती के बाद भक्तों को प्रसाद ग्रहण कराया जाता है। देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी में कोई भूखा नहीं सोता। शास्त्र पुराण इसे इस नगर को अन्नपूर्णेश्वरी का वरदान बताते हैं। बाबा मां अन्नपूर्णा के सामने याचक मुद्रा में झोली फैलाते हैैं, भिक्षा में जो कुछ पाते हैैं उससे अपनी नगरी का पालन-पोषण करते हैैं। इसका दर्शन श्री काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में विराजमान माता के दरबार मेें हो जाता है तो इसका साकार रूप काशी विश्वनाथ अन्न क्षेत्र में चल रही 'शिव की रसोई' में  नजर आता है। 

दशाश्वमेध के टेढ़ीनीम गली स्थित जी प्लस फाइव मंजिला अन्न क्षेत्र भवन में रंगभरी एकादशी पर इसका शुभारंभ किया गया था। इसमें बाबा की मध्याह्न भोग आरती के बाद भक्तों को भोग प्रसाद ग्रहण कराया जा रहा है। इसमें दोपहर 12:30 बजे से 3 बजे तक बड़ी श्रद्धा के साथ चावल, सांभर, दो तरह की सब्जी और पापड़ आदि परोसा जा रहा है। बता दें कि इसका प्रबंध दानदाताओं के सहयोग से किया जा रहा है। हालांकि भवन हाल की क्षमता एक साथ 1000 लोगों को बैठा कर खिलाने की है लेकिन फिलहाल रोजाना 500 लोगों को प्रसाद ग्रहण कराने का लक्ष्य रखा गया है। भोग-भंडारा में भागीदारी के लिए न्यूनतम 1100 रुपए की राशि तय की गई है। इसमें सपरिवार भोजन पकाने में सहयोग व प्रसाद परोसने का मौका दिया जा रहा है। साथ ही स्वजनों के साथ किसी एक पहर की आरती व सुगम दर्शन की भी सुविधा दी जा रही है। 

इस दौरान पहले तय किया गया था कि श्रद्धालुओं को मंदिर में दर्शन के बाद या बांसफाटक स्थित हेल्प डेस्क पर भोग प्रसाद के लिए नि:शुल्क कूपन दिया जाएगा। इससे सीधे अन्न क्षेत्र पहुंचने वाले भक्तों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे में अब अन्न क्षेत्र में भी कूपन की व्यवस्था कर दी गई है। इसका निर्माण पिछले साल ही पूरा हो गया था। इस पर 13 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। इसमें भोजन पकाने के लिए अत्याधुनिक रसोई के साथ-साथ हाईटेक उपकरण भी लगाए गए हैैं। 



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