Gangaur fast

इस तरह मनाए गणगौर व्रत और जानिए इसकी पूजा विधि

15 अप्रैल यानि के आज गणगौर व्रत मनाया जा रहा है। यह व्रत विशेष रूप से महिलाओं का होता है। इस दिन महिलाए दुपहर तक व्रत रखती और अपने पति की लम्बी उम्र के लिए कामना करती है। यह व्रत विशेष रूप से राजस्‍थान में मनाया जाता है। इस दिन महलिया नाचती गाती है और भगवान शिव जी और माता पार्वती जी की पूजा की जाती है। 

- चैत्र कृष्ण पक्ष की एकादशी को प्रातः स्नान करके गीले वस्त्रों में ही रहकर घर के ही किसी पवित्र स्थान पर लकड़ी की बनी टोकरी में जवारे बोना चाहिए।

- इस दिन से विसर्जन तक व्रती को एकासना (एक समय भोजन) रखना चाहिए।

- इन जवारों को ही देवी गौरी और शिव या ईसर का रूप माना जाता है।

- जब तक गौरीजी का विसर्जन नहीं हो जाता (करीब आठ दिन) तब तक प्रतिदिन दोनों समय गौरीजी की विधि-विधान से पूजा कर उन्हें भोग लगाना चाहिए।

- गौरीजी की इस स्थापना पर सुहाग की वस्तुएं जैसे कांच की चूड़ियां, सिंदूर, महावर, मेहंदी, टीका, बिंदी, कंघी, शीशा, काजल आदि चढ़ाई जाती हैं।

- सुहाग की सामग्री को चंदन, अक्षत, धूप-दीप, नैवेद्यादि से विधिपूर्वक पूजन कर गौरी को अर्पण किया जाता है।

- इसके पश्चात गौरीजी को भोग लगाया जाता है।

- भोग के बाद गौरीजी की कथा कही जाती है।

- कथा सुनने के बाद गौरीजी पर चढ़ाए हुए सिंदूर से विवाहित स्त्रियों को अपनी मांग भरनी चाहिए।

- कुंआरी कन्याओं को चाहिए कि वे गौरीजी को प्रणाम कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।

- चैत्र शुक्ल द्वितीया (सिंजारे) को गौरीजी को किसी नदी, तालाब या सरोवर पर ले जाकर उन्हें स्नान कराएं।

- चैत्र शुक्ल तृतीया को भी गौरी-शिव को स्नान कराकर, उन्हें सुंदर वस्त्राभूषण पहनाकर डोल या पालने में बिठाएं।

- इसी दिन शाम को गाजे-बाजे से नाचते-गाते हुए महिलाएं और पुरुष भी एक समारोह या एक शोभायात्रा के रूप में गौरी-शिव को नदी, तालाब या सरोवर पर ले जाकर विसर्जित करें।

- इसी दिन शाम को उपवास भी छोड़ा जाता है।

गणगौर तीज 2021- पूजन के शुभ मुहूर्त
गणगौर होलिका दहन के दूसरे दिन चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से चैत्र शुक्ल तृतीया तक यानी 17 दिनों तक चलने वाला पर्व है। गौरी पूजा का आरंभ 29 मार्च 2021 (सोमवार) से शुरू हो गया है तथा गौरी पूजा की समाप्ति 15 अप्रैल (गुरुवार) को होगी।

इस दौरान गणगौर तीज पूजा का मुख्य पर्व 15 अप्रैल 2021, (गुरुवार) को मनाया जाएगा। इस वर्ष चैत्र शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि का आरंभ 14 अप्रैल को दोपहर 12.47 मिनट से होगा तथा 15 अप्रैल को शाम 03.27 मिनट चैत्र शुक्ल तृतीया तिथि समाप्त होगी।
गणगौर पूजा शुभ मुहूर्त की अवधि कुल 35 मिनट होगी, जो कि 15 अप्रैल को सुबह 05.17 मिनट से 06.52 मिनट तक रहेगी।



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