भ्रष्टाचार मामले में फंसे IAS Ashok Khemka को High Court से राहत

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भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे आईएएस अधिकारी अशोक खेमका को हाईकोर्ट ने राहत देते हुए उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर में उन्हें गिरफ्तार किए जाने पर रोक लगा दी है। साथ ही उन्हें इस मामले की जाँच में शामिल होने के आदेश भी दे दिए हैं। जस्टिस अवनीश झंगिन यह आदेश अशोक खेमका द्वारा अपने खिलाफ 26 अप्रैल को दर्ज एफआईआर को रद्द किए जाने की रद्द किए जाने की मांग को लेकर दायर याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए यह आदेश दिए हैं।

इस मामले में हरियाणा सरकार सहित हरियाणा वेयर हाउसिंग कारपोरेशन और संजीव वर्मा को 4 अगस्त के लिए नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया है। खेमका ने अपनी याचिका में कहा है कि उनके खिलाफ दर्ज की गई यह एफआईआर कानूनी रूप से मान्य ही नहीं है, क्योंकि यह भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 17 ए के तहत पूर्व स्वीकृति के बिना दर्ज की गई थी। याचिका के अनुसार उन्होंने कोई अपराध नहीं किया गया है।

एफआईआर में उन पर लगाए गए आरोप उचित नहीं है, क्योंकि उम्मीदवारों की पात्रता एक समिति द्वारा निर्धारित की गई थी और चयन को कार्यकारी समिति द्वारा अंतिम रूप दिया गया था। याचिकाकर्ता द्वारा नियुक्ति जारी करना केवल एक विभागीय औपचारिकता भर थी। खेमका का कहना है कि उनके खिलाफ यह एफआईआर रंजिश के कारण ही दर्ज की गई है। खेमका की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट आरएस चीमा ने हाईकोर्ट को बताया कि इस मामले की 2016, 2017, और 2018 में पुलिस द्वारा पहले ही 3 बार जांच की जा चुकी है और कोई अपराध नहीं निकला।

अब वर्तमान एमडी द्वारा मामले में एफआइआर दर्ज करवा दी गई है। बता दें कि इस मामले में खेमका के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों में पंचकूला के सेक्टर 5 थाने में एफआईआर दर्ज की गई है कि वर्ष 2010 में हरियाणा वेयर हाउसिंग कारपोरेशन के एमडी पद पर रहते हुए प्रथम श्रेणी के 2 अधिकारियों की गलत ढंग से नियुक्ति की गईं। यह दोनों अधिकारी मैनेजर रैंक के हैं। हरियाणा वेयर हाउस कार्पोरेशन के एमडी संजीव वर्मा की शिकायत पर यह एफआईआर दर्ज की गई थी।