Haryana सेवा का अधिकार आयोग ने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग पर कसा शिकंजा

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हरियाणा सेवा का अधिकार आयोग ने इस बार खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की लापरवाही पर संज्ञान लिया है। आयोग ने पहली जुलाई 2020 से 30 जून 2021 के दौरान देरी से राशन कार्ड जारी करने के मामलों में विभाग पर शिकंजा कसा है। आयोग ने इन मामलों में मिले जवाब पर कार्यवाही करते हुए एक केस में 10,000 जबकि 31 अन्य मामलों में 20,000 रुपये प्रति मामले की दर से 6.20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता था। इसके अतिरिक्त आयोग ने कुछ अन्य मामलों में जुर्माना लगाने के आदेश जारी करने का निर्णय लेने और तकनीकी कारणों से हुई देरी से संबंधित मामलों में विभाग को अपनी टिप्पणी देने के लिए कहा है। इन कर्मचारियों को भी दिए गए नोटिस : नौ कर्मचारियों को अधिसूचित सेवाओं के समय पर निपटान में देरी का कारण बताने के लिए नोटिस दिए गए थे।

पलवल के पांच मामलों में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के निरीक्षक ब्रहम दत्त, आठ मामलों में उपनिरीक्षक योगेश, अन्य आठ मामलों में निरीक्षक बेद सिंह एवं 31 मामलों में उपनिरीक्षक रवि प्रकाश, यमुनानगर के एक मामले में डीएफएससी कुशल पाल बुरा, अंबाला के दो मामलों में उपनिरीक्षक बालक राम, गुरुग्राम के एक-एक मामले में निरीक्षक प्रेम पूर्ण सिंह एवं निरीक्षक अनु और पानीपत के 56 मामलों में निरीक्षक भूपेन्द्र अहलावत को संज्ञान नोटिस जारी किया गया था। उन्हें 22 अप्रैल तक जवाब भेजने और 26 अप्रैल को व्यक्तिगत या वीसी के माध्यम से आयोग के समक्ष पेश होने के आदेश दिए गए थे। ब्रहम दत्त को छोड़कर शेष सभी से समय पर जवाब प्राप्त हुए और वे वीसी से आयोग के समक्ष प्रस्तुत हुए। आयोग ने विभाग को ब्रहम दत्त से सहयोग न करने के लिए स्पष्टीकरण देने और आयोग को उसकी नियुक्तियों की विस्तृत जानकारी देने के आदेश दिए हैं ताकि मामले में आगे कार्यवाही की जा सके।

आयोग उपनिरीक्षक योगेश के जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ कि देरी के आठ मामलों में से चार मामले होडल ब्लॉक के हैं जबकि वह पलवल सर्कल में कार्य कर रहा था। चार आवेदन उनकी लॉगिन पर दिखाई नहीं दे रहे, जो संबंधित एएफएसओ के पास लंबित हो सकते हैं। आयोग ने विभाग को होडल ब्लॉक के आवेदनों के संबंध में दिए गए जवाब पर उसकी टिप्पणी मांगी है। राशि जमा न करवाने पर आयोग करेगा अगली कार्यवाही निरीक्षक बेद सिंह, अनु और भूपेन्द्र अहलावत द्वारा समय पर कार्यवाही न होने के लिए तकनीकी कारणों को जिम्मेदार बताया। जिस पर आयोग ने विभाग को तकनीकी मुद्दों साथ-साथ बिजली एवं इंटरनेट की कमी के संबंध में अपनी टिप्पणी देने और विभाग की कार्यवाही के सुचारू संचालन के लिए इनकी बेहतर आपूर्ति सुनिश्चित करने को कहा है। उपनिरीक्षक रवि प्रकाश ने बताया कि कोविड के कारण उत्पन्न कनैक्टिविटी समस्या और उसके बेटे के बीमार होने के कारण वह समय पर डयूटी पूरी नहीं कर पाया।

आयोग ने उसकी परिस्थितियों को सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए 31 मामलों में 10,000 जुर्माना लगाने का निर्णय लिया जबकि 20000 रुपये प्रति मामले की दर से उस पर 6.20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता था। राशि समय पर जमा न करवाने पर आयोग कानूनन कार्यवाही करेगा। ईंट भटठा लाइसेंस जारी करने के संबंध में हुई देरी के लिए डीएफएससी कुशल पाल बुरा ने तहसीलदार रादौर और जगाधरी के एएफएसओ विरेन्द्र कुमार को जिम्मेदार ठहराया। आयोग उसके जवाब से संतुष्ट था। आयोग द्वारा तत्कालीन तहसीलदार रादौर और जगाधरी के एएफएसओ वीरेन्द्र कुमार को आवेदन के निष्पादन में हुई देरी का कारण बताने के लिए स्वत: नोटिस जारी किया गया है। आयोग ने बालक राम और प्रेम पूर्ण सिंह को 20 मई तक अपना जवाब प्रेषित करने का अवसर दिया है और ऐसा न करने पर आयोग द्वारा यह मान लिया जाएगा कि उन द्वारा दी गई मौखिक जानकारी गलत है और उन पर जुर्माना लगाने के आदेश जारी करेगा।