China

चीन से अलग होना सिर्फ कुछ अमेरिकी राजनीतिज्ञों का तमाशा

एक अमेरिकी नेता ने हाल ही में एक साक्षात्कार में फिर चीन से अलग होने की चर्चा की। उनका कहना है कि अमेरिका का चीन के साथ कारोबार करना जरूरी नहीं है। इधर कुछ महीनों में कुछ अमेरिकी राजनीतिज्ञों ने बार-बार ऐसा कथन दिये हैं, लेकिन विशेषज्ञों के नजर में यह सिर्फ आम चुनाव से पहले एक राजनीतिक तमाशा है।

अमेरिकी वाणिज्य और उद्योग जगत ने चीन से अलग होने पर कड़ा विरोध जताया है। उनके दबाव में अमेरिकी राजनीतिज्ञों को अपने रूख में शैथिल्य लाना पड़ा है। इससे साबित है कि चीन से अलग होना महज अमेरिकी राजनीतिज्ञों का प्रदर्शन है। भविष्य में वह शायद हमेशा एक काल्पनिक संज्ञा के रूप में बना रहेगा।

आर्थिक भूमंडलीकरण में कोई भी देश अकेला नहीं रह सकता। खासकर कोविड-19 महामारी के देर दौर में विभिन्न देशों को उत्पादन बहाल कर व्यावसायिक चेन और सप्लाई चेन की स्थिरता बनाए रखने की जरूरत है। इस दौरान विभिन्न देश सिर्फ मिलकर काम करने से आगे बढ़ सकेंगे।

यह निसंदेह है कि अमेरिकी उद्यमों को चीन के विशाल बाजार की जरूरत है और वे चीन से अलग नहीं हो सकते और वे भी चीन से नहीं रवाना होना चाहते हैं। चीन और अमेरिका के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के बाद 40 वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों के सहयोग से जाहिर हुआ है कि द्विपक्षीय सहयोग पारस्परिक लाभ वाला है और दोनों देशों की जनता को इससे लाभ मिला है।

अमेरिकी राजनीतिज्ञों को अपने देश के वाणिज्य व उद्योग जगत की आवाज ध्यान से सुनकर तथाकथित चीन से अलग होने का उकसावा नहीं करना चाहिए और गंभीर संकट से जूझ रहे अमेरिकी अर्थव्यवस्था की बहाली के लिए अपनी जिम्मेदारी उठानी चाहिए। (साभार---चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)