Hukamnama Hukamnama 1 April

हुक्मनामा श्री हरिमंदिर साहिब जी 1 अप्रैल

तिलंग घरु २ महला ५ ॥   तुधु बिनु दूजा नाही कोइ ॥   तू करतारु करहि सो होइ ॥   तेरा जोरु तेरी मनि टेक ॥   सदा सदा जपि नानक एक ॥१॥  सभ ऊपरि पारब्रहमु दातारु ॥   तेरी टेक तेरा आधारु ॥ रहाउ ॥    है तूहै तू होवनहार ॥   अगम अगाधि ऊच आपार ॥   जो तुधु सेवहि तिन भउ दुखु नाहि ॥   गुर परसादि नानक गुण गाहि ॥२॥  

 हे प्रभु! तुन सारे संसार का पैदा करने वाला है, जो कुछ तूं करता है, वोही होता है, तेरे बिना और कोई दूसरा कुछ कर सकने वाला नहीं है। (हम जीवों को) तेरी ही शक्ति है, (हमारे) मन में तेरा ही सहारा है। हे नानक! सदा ही उस उस एक परमात्मा का नाम जपता रहो।१। हे भाई! सब जीवों को बक्शीश देवे वाला परमात्मा सब जीवों के सर ऊपर राखा है। हे प्रभु! (हम जीवों) को तेरा ही आसरा है, तेरा ही सहारा है।रहाउ। हे अपहुच प्रभु। हे अथाह प्रभु! हे सब से ऊँचे और बयंत प्रभु! हर जगह हर समय तूं ही तूं मौजूद है, तूं ही सदा कायम रहने वाला है। हे प्रभु! जो मनुख तुम्हे याद करते हैं, उन को कोई डर घेर नहीं सकता। हे नानक! गुरु की कृपा से ही (मनुख परमात्मा के) गुण गा सकता है।२।



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