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#Mannkibaat पीएम मोदी ने कृषि बिल के गिनाए फायदे, कहानियों का भी बताया इतिहास

नई दिल्लीः प्रधानमंत्री मोदी ने अपने प्रसिद्ध रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के दौरान रविवार को कहानी कहने की कला यानी स्टोरी टेलिंग पर चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत में किस्सा-गोई की समृद्ध परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि कोरोना के इस कालखंड में पूरी दुनिया अनेक परिवर्तनों के दौर से गुजर रही है। आज, जब दो गज की दूरी एक अनिवार्य जरूरत बन गई है, तो इसी संकट काल ने, परिवारों के सदस्यों को आपस में जोड़ने और करीब लाने का काम भी किया है।इसी के साथ पीएम मोदी ने कई प्रेरक प्रसंग उठाए. महात्मा गांधी, भगत सिंह से लेकर खेती-किसानी तक के मुद्दे पर बात की. उन्होंने कृषि बिल के फायदे बताए। 

प्रधानमंत्री ने कहा, हरियाणा के एक किसान भाई में मुझे बताया कि कैसे एक समय था जब उन्हें मंडी से बाहर अपने फल और सब्जियां बेचने में दिक्कत आती थी लेकिन 2014 में फल और सब्जियों को APMC Act से बाहर कर दिया गया, इसका उन्हें और आसपास के साथी किसानों को बहुत फायदा हुआ। इन किसानों के अपने फल - सब्जियों को कहीं पर भी, किसी को भी बेचने की ताकत है और ये ताकत ही उनकी इस प्रगति का आधार है।

प्रधानमंत्री ने कहा, कोरोना संकट के काल में भी कृषि क्षेत्र ने अपना दमखम दिखाया है।  देश के किसान, गांव जितना मजबूत होंगे, देश उतना आत्मनिर्भर होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि किसानों की मजबूती से ही आत्मनिर्भर भारत की नींव बनेगी. किसान मजबूत होगा तो भारत आत्मनिर्भर बनेगा।

उल्लेखनीय है कि कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों के भारी विरोध के बावजूद हाल में कृषि विधेयक आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक, 2020, कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक 2020 तथा कृषक (सशक्तीकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन एवं कृषि सेवा पर करार विधेयक, 2020 को संसद से पारित कर दिया गया था।देशभर के कई हिस्सों खासकर पंजाब और हरियाणा के किसान तथा किसान संगठन इन विधेयकों को किसान विराधी बताकर प्रदर्शन कर रहे हैं।

कहानी सुनाने की कला यानि स्टोरी टेलिंग

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "हमें, जरूर एहसास हुआ होगा कि हमारे पूर्वजों ने जो विधायें बनाई थी, वो आज भी कितनी महत्वपूर्ण हैं और जब नहीं होती हैं तो कितनी कमी महसूस होती है। ऐसी ही एक विधा जैसे मैने कहा, कहानी सुनाने की कला यानि स्टोरी टेलिंग।"

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "जो हमारी परंपराएं थीं, जो परिवार में एक प्रकार से संस्कार सरिता के रूप में चलती थी, उसकी कमी महसूस हो रही है, ऐसा लग रहा है कि बहुत से परिवार हैं जहां से ये सब खत्म हो चुका है, और इसके कारण, उस कमी के रहते हुए, इस संकट के काल को बिताना परिवारों के लिए थोड़ा मुश्किल हो गया, और, उसमें एक महत्वपूर्ण बात क्या थी? हर परिवार में कोई-न-कोई बुजुर्ग, बड़े व्यक्ति परिवार के, कहानियां सुनाया करते थे और घर में नई प्रेरणा, नई ऊर्जा भर देते हैं।"

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कहानियों का इतिहास उतना ही पुराना है जितनी कि मानव सभ्यता। कहानियां, लोगों के रचनात्मक और संवेदनशील पक्ष को सामने लाती हैं, उसे प्रकट करती हैं। कहानी की ताकत को महसूस करना हो तो जब कोई मां अपने छोटे बच्चे को सुलाने के लिए या फिर उसे खाना खिालने के लिए कहानी सुना रही होती है, तब देखें।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "भारत में कहानी कहने की, या कहें किस्सा-गोई की, एक समृद्ध परंपरा रही है। हमें गर्व है कि हम उस देश के वासी हैं, जहां हितोपदेश और पंचतंत्र की परंपरा रही है, जहां, कहानियों में पशु-पक्षियों और परियों की काल्पनिक दुनिया गढ़ी गई, ताकि, विवेक और बुद्धिमत्ता की बातों को आासानी से समझाया जा सके। हमारे यहां कथा की परंपरा रही है। ये धार्मिक कहानियां कहने की प्राचीन पद्धति है। इसमें कताकालक्षेवम भी शामिल रहा है।"