रावण की सोने की लंका

Dussehra 2020: जानिए रावण की सोने की लंका जलने के पीछे के श्राप के बारे में

राजा रावण मंडावी रामायण का एक प्रमुख प्रतिचरित्र है। रावण लंका का राजा था। वह अपने दस सिरों के कारण भी जाना जाता था, जिसके कारण उसका नाम दशानन भी था परंतु आदिवासी सभ्यता के अनुसार दशानन मतलब राजा। किसी भी कृति के लिये नायक के साथ ही सशक्त खलनायक का होना अति आवश्यक है। किंचित मान्यतानुसार रावण में अनेक गुण भी थे। सारस्वत ब्राह्मण पुलस्त्य ऋषि का पौत्र और विश्रवा का पुत्र रावण एक परम भगवान शिव भक्त, उद्भट राजनीतिज्ञ , महाप्रतापी, महापराक्रमी योद्धा, अत्यन्त बलशाली , शास्त्रों का प्रखर ज्ञाता, प्रकान्ड विद्वान, पंडित एवं महाज्ञानी था। रावण के शासन काल में लंका का वैभव अपने चरम पर था और उसने अपना महल पूरी तरह स्वर्ण रजित बनाया था, इसलिये उसकी लंकानगरी को सोने की लंका अथवा सोने की नगरी भी कहा जाता है। रावण का विवाह मंदोदरी से हुआ । मान्यता है कि मंदोदरी का जन्म मध्यप्रदेश के मंदासौर जिले में हुआ था । वहां पर आज भी महाराजा रावणजी को पुजा जाता है वहा आज भी रावण की चावरी है, जिस जगह पर रावण का विवाह हुआ था ।

लंका दहन रामायण का एक महत्वपूर्ण प्रसंग है. सभी जानते हैं कि हनुमान जी ने लंका को जलाकर भस्म कर दिया था. लेकिन लंका के जलने का यही कारण था या फिर इसके पीछे कोई ऐसी वजह है जिसके बारे में अधिक लोग नहीं जानते हैं.  दरअसल मां पार्वती के श्राप के कारण रावण की सोन की लंका जलकर राख हो गई थी.

कथा कुछ यूं हैं कि एक बार भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी मां पार्वती के निमंत्रण पर कैलाश पहुंचे. इस दौरान मां लक्ष्मी ठंड ठिठुर रही थी. जब उनसे न रहा गया तो उन्होंने पार्वती से कहा कि आप राजकुमारी होते हुए भी इस हिम-पर्वत पर इतने ठंड में कैसे रह रहीं हैं? इससे मां पार्वती को बहुत दुख है.

कुछ दिनों बाद शिव और पार्वती देवी लक्ष्मी के बुलावे पर बैकुंठ धाम पहुंचे. बैंकुठ धाम का वैभव देखकर मां पार्वती ने शिव से भी अत्यंत भव्य महल बनाने की इच्छा जताई. शिव ने देवशिल्पी विश्कर्मा को लंका बनाने की काम सौंपा. इसके बाद ही उन्होंने सोने के महल का निर्माण किया.

इस महल की वस्तुप्रतिष्ठा की पूजा के लिए ऋषि विश्रवा को बुलाया गया था लेकिन वह महल की सुंदरता के दीवाने हो गए और उन्होंने यह महल ही शिव से दान में मांग लिया. शिव ने ऋषि विश्रवा को यह महल दान कर दिया.

मां पार्वती इससे बड़ी क्रोधित हुई और उन्होंने विश्रवा को श्राप देते हुए कहा कि तेरी यह नगरी भस्म हो जाए. पार्वती के श्राप के कारण ही रावण द्वारा रक्षित वह लंका हनुमान ने फूँक डाली थी. गौरतलब है कि श्रषि विश्रवा ही रावण के पिता थे.