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क्या मॉरिसन का समर्थन करने वाले पश्चिमी राजनीतिज्ञ अंधे हैं ?

इन दिनों ऑस्ट्रेलियाई सैनिकों द्वारा अफ़गानिस्तान में निर्दोष लोगों की निर्मम हत्या संबंधी मामले पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय कड़ी निंदा कर रहा है। लेकिन, ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने अपने सैनिकों की गंभीर आपराधिक कार्रवाई को लेकर क्षमा नहीं मांगी, इसके विपरीत उन्होंने चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता द्वारा सोशल मीडिया पर ऑस्ट्रेलियाई सैनिकों के अत्याचार पर आरोप लगाने वाली तस्वीर को पोस्ट किए जाने को लेकर चीन से माफ़ी मांगने को कहा। ऑस्ट्रेलिया एक दुखद मजाक बन रहा है। फिलहाल, ऑस्ट्रेलिया के कुछ साथी देशों के राजनीतिज्ञ और मीडिया मॉरिसन के समर्थक बने। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर चीन का मुकाबला करने को कहा। आखिरकार इसके पीछे उनका क्या षड्यंत्र है?   

सर्वप्रथम, लोगों द्वारा ऑस्ट्रेलिया पर टिकी नजर को हटाना और उसकी आपराधिक कार्रवाई को ढंकने में सहायता देना। पश्चिमी जगत में वास्तविकता पर आधारित राजनीतिक कॉमिक चित्र के माध्यम से वर्तमान खराब-स्थिति पर आरोप लगाना सामान्य बात है।“कॉमिक अधिकार”की रक्षा करने वाले देश चीनी चित्रकारों का“कॉमिक अधिकार”क्यों नहीं सह सकते? तथ्य यह है कि पश्चिमी देश दोहरे मापदंड अपनाते हुए अपने समान प्रतिद्वंद्वी का मुकाबला करते हैं। इसके लिए उन्होंने सबसे बुनियादी अंतरराष्ट्रीय न्याय और नैतिकता को छोड़ दिया।  दूसरी तरफ़, ऑस्ट्रेलिया के मित्र होने ने नाते, अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों की सेना भी साफ़ नहीं है। एक सूत्र ने एक बार ऑस्ट्रेलियाई रक्षा सलाहकार सामंथन क्रॉम्पोवेट्स को बताया था कि ऑस्ट्रेलियाई सैनिकों ने जो किया था, ब्रिटिश और अमेरिकी सैनिकों ने उनसे भी ज्यादा किया। जाहिर है कि अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देश ऑस्ट्रेलिया के बराबर हैं। वे अपने अपराधों के उजागर होने और "मानव अधिकारों" वाले मुखौटे का पर्दाफाश होने से बचने के लिए चीन को ताकत दिखाना चाहते हैं।

वहीं, जिद्दी वैचारिक पक्षपात अपनाने वाले पश्चिमी राजनीतिज्ञों का मानना है कि वे समान मूल्य अवधारणा का समुदाय हैं, जिनके पास प्राकृतिक नैतिकता की "श्रेष्ठता" और "निर्णय का अधिकार" है। वे हर मौके पर चीन और अन्य अप्रिय देशों पर आरोप लगाते हैं, लेकिन चीन को बदले में अपने बुरी कार्रवाइयों की आलोचना करने की अनुमति नहीं देते। आज की दुनिया में, बड़े देश और छोटे देश समान हैं। पश्चिमी देशों के राजनीतिज्ञों के मॉरिसन के ज्यादा समर्थन से अंतरराष्ट्रीय समुदाय ऑस्ट्रेलियाई सैनिकों की आपराधिक कार्रवाई को और स्पष्ट रूप से देख सकता है, और साथ ही उनका पाखंड और अभिमानी दोहरा मापदंड भी जल्द ही साफ़ दिखाई पड़ता है।
(साभार-चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)


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