11 April 2020 Hukamnama, Hukamnama, हुक्मनामा श्री हरिमंदि

हुक्मनामा श्री हरिमंदिर साहिब जी 11 अप्रैल

जैतसरी महला ४ घरु २
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ हरि हरि सिमरहु अगम अपारा ॥ जिसु सिमरत दुखु मिटै हमारा ॥ हरि हरि सतिगुरु पुरखु मिलावहु गुरि मिलिऐ सुखु होई राम ॥१॥ हरि गुण गावहु मीत हमारे ॥ हरि हरि नामु रखहु उर धारे ॥ हरि हरि अम्रित बचन सुणावहु गुर मिलिऐ परगटु होई राम ॥२॥

राग जैतसरी, घर २ में गुरु रामदास जी की बाणी।अकाल पुरख एक है और सतगुरु की कृपा द्वारा मिलता है। हे भाई ! उस अपहुच और बयंत परमात्मा का नाम सुमीर करो, जिस को सुमिरन करने से हम जीवों का हरेक दुःख दूर हो सकता है। हे हरी! हे प्रभु! हमे गुरु महापुरख मिला de। अगर गुरु मिल जाए, तो आत्मिक आनंद प्राप्त हो जाता है॥1॥ हे मेरे मित्रो! परमात्मा की सिफत-सलाह के गीत गया करो, परमात्मा का नाम अपने हृदय में बसाई रखो। परमात्मा की सिफत-सलाह के आत्मिक जीवन देने वाले बोल (मुझे भी) सुनाया karo। (हे मित्रो! गुरु की सरन पड़े रहो), अगर गुरु मिल जाए, तो परमात्मा हृदय में प्रकट हो जाता है॥२॥